जाने कब से शुरू करे पूर्णमासी का व्रत,क्यों रखा जाता हैं पूर्णमासी व्रत और क्या हैं इसके महत्व।

पूर्णमासी व्रत:सनातन धर्म में पूर्णमासी व्रत महत्वपूर्ण हैं। यह व्रत वर्ष में 12 बार आती हैं। इस दिन भगवान विष्णुजी, लक्ष्मी माता और चन्द्रमा  सहित शिव पार्वती की पूजा की जाती हैं।

व्रत के महत्वपूर्ण बातें

आइए जानते हैं कि पूर्णमासी व्रत कब से शुरू किया जाता हैं और क्यों।जाने प्रदोष व्रत क्यों किया जाता हैं? क्या है विधि और जाने व्रत का महत्व व विशेषता।

  कब से शुरू करे पूर्णमासी व्रत:पूर्णमासी व्रत आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णमासी से शुरू किया जाता हैं।जिसे शरद पूर्णिमा के  नाम से भी जाना जाता हैं। ज्योतिषशास्त्र की मान्यता है कि  पूरे साल में चन्द्रमा  इसी दिन षोडश कलाओं में होता हैं ।

व्रत क्यों किया जाता हैं: यह व्रत हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण व्रत है।इसे हर माह की पूर्णिमा तिथि को किया जाता है। यह व्रत विशेष रूप से पवित्रता, तपस्या और साधना के लिए किया जाता है। इस व्रत को करने से व्यक्ति की सभी इच्छाएं पूरी होती है।व चन्द्र देव की कृपा हमेशा व्यक्ति पर बनी रहती हैं।

व्रत के कारण

इसके पीछे कुछ प्रमुख कारण होते हैं:

आध्यात्मिक उन्नति: इस व्रत से व्यक्ति के मन और आत्मा की शुद्धि होती है। यह व्रत ध्यान और साधना को बढ़ावा देता है।जिससे आत्मज्ञान और आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है।

पुण्य और आशीर्वाद: इसे करने से व्यक्ति को पापों का नाश और भगवान से आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह व्रत विशेष रूप से भगवान शिव, विष्णु या देवी पूजा के रूप में किया जाता है।जिससे व्यक्ति के जीवन में सुख और समृद्धि आती है।

सकारात्मक ऊर्जा: पूर्णिमा के दिन चंद्रमा का विशेष प्रभाव होता है, जो मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है। इस दिन व्रत रखने से व्यक्ति की मानसिक स्थिति बेहतर रहती है और वह हर कार्य में सफलता प्राप्त करता है।

ऋण मुक्ति: यह व्रत व्यक्ति को अपने कष्टों और ऋणों से मुक्ति दिलाने के लिए भी किया जाता है।

पूर्णमासी व्रत करने से व्यक्ति के जीवन में शांति, समृद्धि और संतुलन बना रहता है।

पूर्णमासी व्रत का महत्व:

इस व्रत के और भी लाभ और कारण हैं, जो इसे और महत्वपूर्ण बनाते हैं:

चंद्रमा की पूजा: पूर्णिमा का दिन चंद्रमा की पूजा के लिए विशेष रूप से माना जाता है। क्योंकि इस दिन चंद्रमा अपनी पूरी शक्ति के साथ आकाश में होता है। चंद्रमा मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन और स्थिरता प्रदान करने में सहायक माना जाता है।

मनोकामना पूर्ति: हिंदू धर्म में मान्यता है कि पूर्णमासी के दिन व्रत करने से व्यक्ति की मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं। यह व्रत उन लोगों के लिए होता है, जो अपनी जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।

नोट: यह जानकारी सामान्य लोक रीतियों पर आधारित हैं।